दोस्ती (Dosti)
वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजानपुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहेमंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़ते चलेंदीप मैं […]
वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजानपुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहेमंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़ते चलेंदीप मैं […]
हुई ज़िन्दगी तमाम कोई फिर गुज़र गयाक्या सबब कौन कौन फिर मैयत मेँ गया आँखें खुलीं थी उसकी अपनों की चाह
निस दिन नया सवेरा आशा का संदेशा लाता हैप्रकृति का सुन्दर स्वरुप मन को अति हर्षाता है पंछियों के कलरव
व्यर्थ के तानों को सुनकर न हो जाना मायूस नहींजतन कोई न समझे मेहनत का गुणगान नहींसौंप दिया परिवार को
देखा है किसी को टुकड़ों पर पलतेभूखा हो पेट पर देखा हो लात खातेबिना बात मारते हैं वो मुझको पत्थरमैंने
सरहद नहीं आँचल है मातृभूमि कापवित्र श्वेत सौम्य टुकड़ा यह पृथ्वी का मेरे कन्धों पर बन्दूक है ज़िम्मेवारीमाँ की लाज
घर के आँगन में आ बैठे थे जो पंछी हवा हुएथका हुआ मानुष बैठा हैं दृष्टि शून्य में धरे हुएसूनी
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता हैमेरे देश में अमन चैन नेता को हज़म नहीं
मन में कुछ सवाल उठते हैं मन की बात कहें किसकोमन की बात वो करते हैं बाक़ी इसका हक़ किसको
ममन समंदर की लहरों को काबू करना सीख लियादिन के पन्नों पर करना हमने हस्ताक्षर सीख लिया ईश्वर बसे न
ले शपथ संकल्प कर सर कलम दुश्मन का करतज के हर चिंता व्यथा हे वीर आगे कूच कर दे रही
अब करेंगे तब करेंगे फ़िक्र कल की कल करेंगेवक़्त के पन्नें पलटते पिघल रही है ज़िन्दगी कतरा कतरा लम्हा लम्हा
मेरे नगमों की पहचान तुमसे हैइन धड़कनों में जान तुमसे हैइज़हार-ए-ज़ज़्बात भले मेरे होंइनके तेवर कद्रदान तुमसे हैं राह-ए-सफर में
माँ मैं तुझको मिल न पाया कैसी है जान न पायाआखिर किस डर की खातिर मुझको मार गिराया! मैं तो
मेरे प्यारे बच्चे गुनहगार मैं तेराबिना सोचे समझे तुझे दुनिया में लायायह दुनिया जो नफरत की शै पर टिकी हैपसरा
वह गिर गया था सड़क पर टकराने के बादउसकी बाइक को मारा था सामने से बस नेआया उसे याद बहुत
नया एक घर बना था आलीशानदेखते उसे पापा पोता दादाजानसोच गहरी एक दूजे से अनजान नया एक घर बना था
एक किस्से से कई किस्से बनाये जा रहा हूँ,कुछ छुपाये तो कुछ सुनाये जा रहा हूँ एक किस्से से कई
श्रीकृष्ण उवाच:जीवन है पार्थ एक महाभारत आरम्भ जो है तो अंत भी हैआरम्भ जो तेरे हाथ नहीं तो अंत भी तेरे
गरीब किसान का बेटा था मेरा भी परिवार थामजबूरी में बचपन बीता कर्जे में घर बार था दो बहनों का