अभी बाक़ी है (Abhi Baki Hai)
तेरी नेमतों का क़र्ज़ उतारे बैठा हूँज़िन्दगी है तेरा इंतज़ार बैठा हूँ महक ज़रा तेरी साँसों कीआँखों की हया अभी […]
तेरी नेमतों का क़र्ज़ उतारे बैठा हूँज़िन्दगी है तेरा इंतज़ार बैठा हूँ महक ज़रा तेरी साँसों कीआँखों की हया अभी […]
बदल रहा है मौसम मिज़ाज़ लोगों की तरहहवाएं शायद तेरे शहर से होकर गुज़री हैं ऐ तूफ़ान तेरी ताक़त का
कम बोलता हूँ पुरज़ोर नहीं मैंअंतर्मुखी मगर कमज़ोर नहीं मैं ख़ामोशी खुदा की इबादत हैकम बोलना मेरी आदत हैदलालों की
पावक दहकी क्षितिज क्षितिज मेंग्रीष्म ऋतू आयी यौवन परउष्मायी धरती निज उर मेंपावक दहकी क्षितिज क्षितिज में कुंदन बदन दमकती
मैं बरसाती सूखा नालातुम बाढ़ उफनती नदी प्रियेबेमेल हमारी जोड़ी कानामुमकिन है मिलन प्रिये तुम हॉटडॉग सी हॉट हॉटसंग मुज़रेल्ला
गांव का पीपल जो था आशियाना परिंदों काजलाते थे लोग जिसके तले दुआओं के दिएएक बवंडर उठा वक्त की गोद
एकलव्य होकर भी वह हो गया भव्यअश्वत्थामा होकर भी तुम भटक रहेमृत पराक्रमी वीर धनुर्धर एकलव्यतुम मृत्यु आलिंगन को हो
खबर छपी थी शहीद के परिवार के लिए एक भिखारिन ने जुटाए छः लाख मांगकर भीख यह भावना है विडम्बना
गांव में मचा कोलाहल अखबारों में बनी सुर्खियांटीवी पर हुए चर्चे तमाम और बांटी गयीं बर्फियाँ फौजी का जंग में
जीवन की जब राह चुनी एक राह तब छोड़ी थीदोराहे पर खड़े हुए हुए एक राह चुनी एक छोड़ी थी
कद्र न हो कद्रदान न हों विचलित तुमको नहीं होना हैसौगंध तुम्हें कविता मेरी पथभ्रष्ट कतई नहीं होना है चलन
छेड़ गए थे कभी दिल के तार देखता हूँबिछड़ गए हैं अब जो यार देखता हूँ बेगाने शहरों से अनजाने
आओ खेलो मेरे ज़ज़्बात से फिर एक बारशिकवे शिकायतों का दौर फिर से एक बार Abort तुमने कर दिया Abandon
बीत गया मैं वह वक्त नहीं जुबां से निकला शब्द नहींकमां से छूटा तीर भी नहीं जो लौटकर न आ
मञ्जूषा तुम गाओनए तराने फिर से छेड़ोसुर कोई नया लगाओमञ्जूषा तुम गाओ याद करो जब तुम गाती थीमन की बगिया
तेरे आथित्य का मित्र मेरे आभार व्यक्त करता हूँमैं कृतज्ञ हूँ ह्रदय से निज भाव व्यक्त करता हूँ तुमने जो
कुछ गलत हम कुछ अंदाज़ गलत हो गएहसरतें टूटी तो अलफ़ाज़ गलत हो गएरफ्ता-रफ्ता दरमियाँ फ़ासले बढ़ते गएएहले सफ़र थे हमसफ़र अजनबी
धरती पर एक स्वर्ग का टुकड़ा चाहो जो देखना जीइस छुट्टी में घर मत बैठो चले आओ रेणुका जीदेवभूमि हिमाचल
This thought was seeded by someone into my mind which blossomed into this word engineering.
भावों की गीली मिटटी में फिर खिल उठी निराली कवितानवजीवन की नव उमंग भर नित नव स्वप्न दिखाती कविता सोंधी