ग़रीब नवाज़ (Ghareeb Nawaaz)
खुदा मिलता नहीं कभी ऐश-ओ-आरामों मेंतेरी तकलीफ में मगर आगे खड़ा रहे सदा ग़मों का ग़म न कर है बड़ा […]
खुदा मिलता नहीं कभी ऐश-ओ-आरामों मेंतेरी तकलीफ में मगर आगे खड़ा रहे सदा ग़मों का ग़म न कर है बड़ा […]
गए रोज़ खयालात मेरे चुपचाप थेज़िन्दगी के अजीब बड़े हालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे न था होश मुझे
गोरी पियाजी के घर को चलीदुनिया किसी की बसाने चलीकितनों के अरमान ढीले हुएटुकड़े दिलों को बनाकर चली लड़कों के
ज़ज़्बात की मेरे अजी बोली न लगाओबाजार में हर चीज़ बिकाऊ नहीं होतीछोड़ दो आदत कि हर शै की है
दिन दिवाली दीपक तुम्हाराघर किसी और का तो क्या बात हैथोड़ी मिठाई नए कुछ कपड़ेबालक गरीब का तो क्या बात है हज़ारों
तन्हाईयों के महल में रहते हैं वो याद बनकरकभी रहते थे दुआओं में जो फ़रियाद बनकर वो था मंज़र फुर्सतों
धरती के विशाल सीने में कहीं एक हलचल हुईबीज फूटा कुछ बिखरा और आवाज़ चटक हुई एक नन्हे से पौधे
पेड़ मैं नीम का उग आया एक मकां के दरवाज़े परकिसी जोड़े ने मुझको सींचा और दी मैंने छाँव घर
हज़ारों चेहरों के दरमियाँ इंसां इक सगा होता हैबनकर के जो खास दिल के नगर में जगह लेता है कैसे
हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते क्यूँ होअंदाज़ की तल्खी को दबाते क्यूँ होखफा हो तुम जो तो कह दो हमसेयूँ नज़र
कोशिशें तमाम बेकार हुईंजेहन की पशोपेश मगर हार हुईख़्वाबों को बेइंतेहा दौड़ायाहुनर चुन चुन लफ्ज़ ले लायाकोई तक़रीर न उतरी
फलक से तारे लाना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोचाँद पर घर बनाना चाहता हूँ अगर मंज़ूर हो तो तुम्हारे
ज़ुल्म का अत्याचारकरता जाता नरसंघाररोता विश्व ज़ार ज़ारसरकारें भी लाचारचहुँओर हाहाकारघोर चीख पुकारसर होता खून सवार सिस्टम लाचारव्यर्थ कानूनी तक़रारमातृ
मौत ने फिर चाल चली कोई गुज़र गयाऔर एक बेचारा हसरतों में हो दफन गया चाँद छूने के तो नहीं
छोटी खुशियों में छुपी बड़ी बड़ी बातें हैंघर में सब अपनों मिली ये सौगातें हैंखुशियों का टोकरा हम भर लाते
माफ़िक़ न सही हर रिश्ता निभाया है हमनेगैर ज़माना हुआ मगर साथ निभाया है हमने आसान राहों से लोग छू
भारत की बेटी ये है भारत की बेटीभाग्य देखो कैसे कैसे लाती है बेटी लाल बत्ती पर फटे मैले कपड़ों
किसने फेंका है ठहरे पानी में पत्थरहवा को बांधने की ज़ुर्रत की हैकौन उजाड़ रहा है घरोंदे चिड़ियों केपरिंदों को
बदहवास दौड़ती फिर रही है ज़िन्दगीधुआं धुआं गर्द सिमटती है शहरवालों में आदमी ही आदमी मिलते तो हैं दुकानों मेंआदमी