संभलकर चल (Sambhalkar Chal)
मंज़िल है दूर तन्हा सफर जीत होगी कलपेश आएगी मुश्किल ज़रा संभलकर चल माना कि फेर ली हैं सब अपनों […]
मंज़िल है दूर तन्हा सफर जीत होगी कलपेश आएगी मुश्किल ज़रा संभलकर चल माना कि फेर ली हैं सब अपनों […]
बड़ा अनोखा अंक है दोएक और एक बनाएं दोदो के बीच जो तीजा आयेकिस्सा खत्म हुआ समझो दिन हैं चक्की
सुनो आज ‘एक’ की महिमावृहद् अनोखा इसका ज्ञानअंक नहीं यह केवल ‘एक’गाथा है अत्यंत महान एक है ईश्वर वही साध्य
तुम आये जो करीब मिलते हैं लोग अदब सेहाथों में है हाथ अब डरते हैं सिर्फ रब से अक्सर बिना
घडी भर को सुनो गोरी मेरे पहलू में आनाअपने मम्मी डैडी से ज़रा बच बच के आनातू भी खुद को
सुबह से मन उदास है माँ नहीं है पासचली गयी है वो किसी दुसरे जहान मेंबादलों के पार बन के
सज्जन सत्य को जीवन का सिद्धांत बना लेते हैंउत्कृष्ट चरित्र से खुद की पहचान बना लेते हैंअगली पीढ़ी को भी
स्वप्न नहीं वे जो मनुष्य को नीदों में दिखते हैं स्वप्न तो वे हैं जो आँखों से नींद उड़ा देते
क्यों हो खामोश क्यों इतने हैरां होक्यों हो जैसे अजनबी कुछ तो कहोक्या ग़लत हुआ है क्या बदल गया हैकसम
किस विधि वर्णन करूँ मैं केशव महिमा तेरी को अपारमहा महाभारत के युग में अवतरे तुम बनकर सूत्रधार कौरव वंश और
दो चार अक्षर डारि के दाब दिया जो ‘सर्च’सूचना पूरी मिलै पैसा होय न खर्चहोवे कछु न खर्च नौकरी पक्की
मुफलिसी और फाकों में पैदा हुआज़िल्लतों और ठोकरों में पला था मैंमेरी खता मेरा गुनाह बस इतना थापेट की भूख
मिलकर भी जैसे न मिला उससेभुलाती नहीं है मुझे याद उसकीआज भी कौंधती है बिजली बनमन में सतरंगी मुस्कान उसकी
इस दशहरे दहन करें हम भीतर के रावण काबुद्धि हमारी भ्रष्ट करे अपमान नर नारायण का अपने घर का कूड़ा
सपने जो टूट गए साथी सब छूट गएदिल अपना न रहा कुछ हासिल न रहायादें जो बाकी थी आफत जां
हर दिन नया है सुकूं ही सुकूं हैतेरे सजदे में लगी जब से दिल की लगन रात नयी हैं बात
देश करे आह्वान उठो सब जन गण हिंदुस्तान केछोडो जात धर्म के झगड़े बोलो जय हिन्द शान सेनयी सोच से
आओ कहानी तुम्हें सुनाएँ पैंसठ के उन वीरों कीजोश से जिनके दुश्मन काँपा देश के ऐसे हीरों
बला है यूँ तेरी नज़र का झुक जानाहुए शाम जैसे सूरज का ढल जानाहज़ारों में नहीं तुम एक हो लाखों