डिप चाय की पुड़िया (Dip Chay Ki Pudiya)
गरम पानी की प्याली मेंचलती रेल गाड़ी मेंडिप चाय की पुड़िया कोउसने उलट पुलट डुबोयाउठा पटक इधर उधर घोलाफिर जम […]
गरम पानी की प्याली मेंचलती रेल गाड़ी मेंडिप चाय की पुड़िया कोउसने उलट पुलट डुबोयाउठा पटक इधर उधर घोलाफिर जम […]
किनारे मर्यादा जानते हैंसमंदर की ताकत पहचानते हैं मेरा प्यार भी एक समंदर हैतुम किनारा बन जाओ नमुझे समेट लो
लड़कपन में किस दौर से गुज़र जाते हैंकितने नादां थे हम अब जान पाते हैंहर खूबसूरत चेहरे पे दिल का
तेरी मोहब्बत के चंद फूल रखे थे हमने किताबों मेंखिल जाते हैं फिर जब चले आते हो तुम ख़्वाबों मेंआज
बातों बातों में ही बातें बन गयींबातें मुलाकातों में बदल गयींख़्वाबों में रातें जो बीती थींहकीकत बन रूबरू हो गयीं
एक दौर था शोना बाबू की टॉर हुआ करती थी मंहगी बाइक पर बैठ उनकी चौड़ हुआ करती थी बाइक
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयीलखनऊ शताब्दी मुझे ख़ास मेहमान बनाकर ले गयी सोते सुलाते बतियाते
जितनी दर्द की दिल पर बारिश होती हैजितनी मेरे जुनूं की आजमाईश होती हैतुझे पाने की और भी ख्वाहिश होती
ज़िन्दगी एक दिन और ढलने को है सुहानी रात ये अब ढलने को है एक नयी सुबह निकलने को है
मेरी नज़र से न दुनिया को देखो जहां ये तुम्हारा यूं ही चलेगा गुजर जाएंगे दिन मेरे गम के ये
ग़म संभलता नहीं दम निकलता नहींस्याह रात ये क्यों काटे कटती नहीं हैतेरी खुश्बू से घर अब भी लबरेज हैये
बच्चे के जैसे मुझसे वो बस खेला करता हैखेल कर मुझसे वो यूँ मन बहलाता रहता हैकितनी बार टूटा हूँ
आरजू थी हमें सर उठाए के जीने की रोटी कपड़ा मकां से कुछ ज़्यादा की ज़िद थी कोशिश करते रहे
एक उमर तक ये दर्द मुझे लीलता गयाकमज़र्फ जाते जाते बुरे हाल छोड़ गया खटकता रहा वो किसी किरायेदार सागया
कल फादर्स डे हैबेटी ने याद दिलायाजब उसने बाजार सेमेरे लिए गिफ्ट मंगाया बेटियां ऐसी ही होती हैंहम सोचते रह
ज़िन्दगी से कहाँ कुछ ज़्यादा कमायासच गर कहें तो हमने धोखा ही खायाउम्रदराज़ गोया हम रहे कसमसातेबचपन गया तो सीधा
तेरे प्यार में गिरे थे किसी ज़माने मेंउम्र गुज़र गयी कुल रूठने मानाने मेंउम्र दराज़ मांग कर लाये थे चार
राह अगर वो न मुड़ गयी होतीराह अगर वो न मुड़ गयी होतीतो मंज़िल हासिल हो गयी होती मंज़िल हासिल
तू खुश तो खुश होना है मुझेतू ग़मगीन हो तो रोना है मुझे बॉस है तू मैं हूँ मुलाज़िम तेराउँगली
मैं चला जाऊँगा किसी गुज़रे लम्हे की तरहगया एक बार तो फिर लौटकर न आऊंगा सेहरा किसी की ख़ुशी किसी