मंगल विदाई गीत (Mangal Vidaaee Geet)
लाज तुम घर की सबकी लाड़लीबेटी तुम आज ससुराल चली अरी बिटियातज घर आंगन बंधन पहने हाथों में कंगन हो […]
लाज तुम घर की सबकी लाड़लीबेटी तुम आज ससुराल चली अरी बिटियातज घर आंगन बंधन पहने हाथों में कंगन हो […]
हँसेगौ संग हँसावेगौ बावरौ बिरजू बिरजू बावराटेंशन मुक्त करावेगौ बावरौ बिरजू बिरजू बावरानाचैगौ नचवावेगौ बावरौ बिरजू बिरजू बावराकमर मटकावेगौ बावरौ
मिलने और बिछड़ने में है एक पल का फासलापल में हम मिल गए पल ही में हो जायेंगे जुदाबिछड़ गया
सच कहूं तो इश्क़ मुझे तुमसे नहीं हैऔर भरोसा तो जान हरगिज़ नहींपैवस्त हो दिल में ख़ुलूस की तरहनशे की
तुम जो सही नहीं हो तो कोई बात नहींकम सही ज़रूर हो पर गलत तुम नहींअधूरे इस जहाँ में जब
तुम्हारे तस्सव्वुर में सराबोर हो जाने की ज़िद की हैफिर एक बार रेत मुठ्ठी में दबाने की कोशिश की है
नए शहर की एक गलीजहाँ न पहुँच सके रविसम्मलेन जाने से पहलेगुजरे वहां से कवि बाल आ गए कान परगए
सरकारी दफ्तर में साहब आएंगेखबर आई है की साहब आएंगेनिरिक्षण करने को साहब आएंगेतरक्की देखने को साहब आएंगे दफ्तर सजा
एटिकमेटिक सी मैंने गाड्डी ले देएटिकमेटिक सी मैंने गाड्डी ले देबैठ जाऊं जब मेलेतू मन्ने जाती ने जीपीएस पे टोहवे
मेरा चयन एक सरकारी संस्था में हो गयास्टाफ लिस्ट में यूँ मेरा नाम दर्ज़ हो गया काम करने को एक
पढ़या लिखा हूँ टैलेंटेड हूँग्रेजुएट मैं एम बी ए हूँडाटा दूँ तने रिपोर्ट बनाऊंकम सैलरी पे हुकुम बजाऊंटाइम ते आऊं
मटर को टमाटर से इश्क़ नहीं है मगर टमाटर बिन दाल मटर की गलती नहीं हैहरी है मटर और जो
है सफर वो हसीं जहाँ रेले न झमेलेकोई साथ नहीं मुसाफिर चल अकेले सामान साथ कोई तेरे न जायेगाकारवां तमाम
नानी की थी एक कहानी नानी कहानी बन गयीपरियों के देस घुमाने वाली नानी कहानी बन गयीसर पर हाथ फिराने
एक रोज़ जब रिटायर हो जाऊंगा मैंपहले तो खुद को होश में लाऊंगा मैंदशकों गुलामी की जो आदत लगी हैउस
बेगानी शादी में अब्दुल्ला बनकर दावत उड़ाने का मज़ा कुछ और हैनचना ना आये ढोल पर फिर भी कमर मटकाने
एक बार जो गलती से उस पर हाथ उठ गयाखुद की ही नज़रों में मैं उस दिन से गिर गया
ज़िन्दगी का सफर तो तय चलने से होगारुक कर सोचते रहने से क्या हासिल होगा कितना चले कहाँ पहुंचे इसका
बीवी की मात जो है मेरी सास बनी मेरी बॉसअब मने मुक्ति कोन दिलावेघर बीवी दफ्तर में सास रोज़ मेरीखाट
एक टाइम कम्मो तू कितनी अच्छी लगती थीये नज़र तेरे चेहरे से हटती ही नहीं थीआ जाती थी जो कभी