बाबाजी की बूटी (Babaji Ki Booti)
प्रवचन में बैठे बाबाजी ने फरमायाजिन भक्तों के शरीर पर है दर्द का सायामेरे पास नुस्खा है वो जिसने भी
प्रवचन में बैठे बाबाजी ने फरमायाजिन भक्तों के शरीर पर है दर्द का सायामेरे पास नुस्खा है वो जिसने भी
वो जिनके ख्वाब हमअक्सर सजाय़ा करते थेतसव्वुर में जिनकेदिन गुजारा करते थे उनसे मिलने की बेकरारीमिलकर छूने की बेताबीकाम कोई
जीजा जी बड़े अच्छे हैं,सेल्फी में दिखते अच्छे हैं,रिटायर हुए तो क्या हुआ,घर में ही मीटिंग रखते हैं! हीरो जैसे
चाट पकोड़ी का मन थाजुड़ा उससे क्योंकि बचपन थाठेले वाला जब आयावो बैठी मेरे पास थीरिमझिम की बरसात थी मैंने
दिलबर कभी होते थेभाभीजी बन कर कभीफिर मिल जायें तोऐसा कभी हो जाए तो… बरसों के बाद सोचोबीवी हो साथ
ब्रह्माण्ड के एक छोटे से टुकड़े काछोटा सा हिस्सा है तूअनंत कहानियों में एक कहानी काकेवल एक किस्सा है तू
दांये पैर और बांये पैर के बीच अनबन आईतो दांये हाथ और बांये हाथ में भी ठन आयी गर्दन घूमी
नमस्कार जी नमस्कारआप लोग हैं कैसेआओ झूठ परोसेंसच्चाई जब सामने आयेएक दूजे को कोसेंआओ झूठ परोसें देखो जी बेटा हमारादस
कौन सा ऐसा सगा है बोलोजिस से हमने दगा कियाकाम गिनाओ कोई ऐसाजो हमने पूरा नहीं किया सूरज को हमने
एक था लुलएक थी चुलबुलसाथ नौकरी करते थेहै ये कहानी बिल्कुल टुच्चीसीनियर बंदे कहते थे एक था लुल एक थी
NUMBER ONE SANSTOUGH COMPETITIONDON’T ASPIRE FORNUMBER ONE CONTEST ALWAYS FORNUMBER TWOPROVE HARD HITTERFOR NUMBER ONE NUMBER ONE STAYSPRONE TO LOOSEAS
मैं नहीं कहता कि तुम मुझे याद करोगेआख़िर क्यों मेरे लिए वक़्त बर्बाद करोगेकोशिश थी यही बस मेरी मुझे ऐसा
छटपटा उठा हूँ मैंफड़फड़ा उठा हूँ मैंजिंदगी तेरे तांडवों सेझनझना उठा हूँ मैं भरभरा उठा हूँ मैंचर्मरा उठा हूँ मैँजिंदगी
मेहरबां कचरेवाले तेरे सब चाहने वालेदेख तुझे खुश हो जाते कचरा देने वाले दीवाने तूने कितनों की नींद उड़ा दीतुझसे
ये समंदर यहां कभी पहले तो ना थाकिसने आंसुओं के सैलाब बहाये हैंख्वाबों के जहां कभी रंग सजते थेबेनूर फ़िज़ाओं
तुझ में खुदा हैमुझ में खुदा हैतेरे खुदा सेमेरा दिल लगा हैतेरे खुदा कोमैंने सजदा किया तोदुनिया ने क्योंमुझको काफिर
आओ भाई लाओ अब जाने दोमेरा चश्मा और छड़ी मुझे दो आखिरी दफा नहला दो मुझेउजले कपड़े दो पहना दो
कल फादर्स डे है मेरी बेटी ने याद दिलायाजब उसने बाजार से मेरे लिए गिफ्ट मंगाया बेटियां ऐसी होती हैं
मॉल वाले बिल से पिलाते हैंटपरीवाले दिल से पिलाते हैंमॉल का स्वाद मुँह बन जाएइतनी महँगी गश आ जाए टपरी
समय देख कर उठते होबैठते सोते जगते होघड़ी से ही पूछ करधोते नहाते खाते होजरा देर हो जाए तोबेचैन तुम