इश्क़ का बुलडोज़र…
ताज़ा थे फूल (Taaza The Phool)
ऐ प्यारी फूलों की मालातेरा कोई नहीं है रखवालाताज़ा थे फूल तो देवों का साथ थामुरझाये तो कचरे की पेटी
इंसानियत का बुलडोज़र…
दौड़ (Khargosh Aur Kachhua)
आगे बढ़ने की दौड़ में वो जो खरगोश थाऐसा भागा कि बस भागता ही रह गयायह न सोचा घर परिवार है
इश्क़ का बुलडोज़र…
कुफ्र मत तोलो सजन(Kufr Mat Tolo Sajan)
राख से बने हम राख की तरह जलेराख बनकर ही चले जाना है सजनकुफ्र मत तोलो खुदा के पास जाना
इंसानियत का बुलडोज़र…
जश्न में मुर्गे (Jashn Men Murghe)
कितने मुर्गेतेरे जश्न मेंकुर्बान हो गएलम्बी उम्र कीदुआ तुझे मिलीबेचारेबेजान हो गए
दर्शन का बुलडोज़र…
कोहराम(Kohraam)
कभी कभी मज़बूरी इतनी बढ़ जाती हैकि ज़िन्दगी छोटी पड़ जाती हैशहर के शोरगुल से दूर कहींखामोशी कोहराम मचाती है
इश्क़ का बुलडोज़र…
हम-तुम (Ham-Tum)
हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसेकुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफरचाहत के बाग हुए
इश्क़ का बुलडोज़र…
वो (Woh)
वो आया तो किसी आफत की तरहसंग रहा मेरे बुरी आदत की तरह कर गया इस तरह वो बर्बाद मुझेगया
इश्क़ का बुलडोज़र…
खुशनसीबी (Khushnaseebi)
तेरी आँखों में बसी है मेरी कहानीजिसमें हर दिन की सुबह है सुहानीतेरे बगैर ये दिल था अजब वीरानाहर राह
इंसानियत का बुलडोज़र…
कश्मकश (Kashmakash)
बिखरे हैं टूट कर तार तार अभी तुम्हारे बिना हो रहा है ज़ार ज़ार ये दिल अभी तुम्हारे बिनाडूबे हैं हम
इंसानियत का बुलडोज़र…
सरकारी एक दफ्तर था (Sarkaari Ek Daftar Tha)
सरकारी एक दफ्तर था दफ्तर में एक अफसर था अफसर जितना रॉयल था बाबू उतना लॉयल था अफसर ने पर्चे
इश्क़ का बुलडोज़र…
कांच के महल (Kaanch Ke Mahal)
तुम जो अपने ही ख्यालों में खोई रहती हो बेख्याली में खुद से ही बातें करती रहती हो इल्म है! तुम
इंसानियत का बुलडोज़र…
नौकरी की चाकरी (Naukri Ki Chaakri)
बहुत गुज़रे दिन मन सलामी देते देते एक युग बीतने को है गुलामी खेते खेते मिला जो अब सब तक टुकड़ों
इश्क़ का बुलडोज़र…
दिल का दलदल (Dil Ka DalDal)
मिटटी यहाँ की गीली है यह ज़मीं खोखली सीली है इस पर क्या मकां बनाओगेइस दलदल को पाट सकेवो डांवर कहाँ से
दर्शन का बुलडोज़र…
मैं पल भर हूँ (Main Pal Bhar Hun)
मैं आज जो बीता हुआ एक पल हूँएक लम्हा और बीत जाने वाला पल हूँ मैं भी कभी आज हुआ
इश्क़ का बुलडोज़र…
प्यार का टाइटेनिक (Pyaar Ka Titanic)
लोकल ट्रेन के डिब्बे में रोज़ मिली और जैक डॉसनटाइटेनिक सी लव स्टोरी तुम्हें सुनाता हूं साहेबान भीड़ भाड़ इतनी
इंसानियत का बुलडोज़र…
गाँव की बेटी (Gaanv Ki Beti)
बिन कुछ जाने बिन बोलेवो बस हाँ कर देती हैमात पिता के वचनों परकोई सवाल नहीं करतीमन खराब नहीं करती
इश्क़ का बुलडोज़र…
अब जाने दो ना (Ab Jane Do Na)
छोड़ो भीअब जाने दो ना वक़्त से पहलेभाग्य से ज्यादाकभी किसी कोकहां मिला है वक़्त की पूँछपकड़ कर रोनाछोड़ो भीअब
इंसानियत का बुलडोज़र…
क्यों दिल्ली दूर हो गई है (Kyon Dilli Door Ho Gayi)
एक दौर था कद्र एक दूसरे की थीय़ारी में तेरा मेरा की गिनती नहीं थीमैं तेरे लिए तू मेरे लिए




















