आ भी जा (Aa Bhi Jaa)

ख्वामखां ही किसी से उलझते नहीं
मन किसी से भी मैला रखते नहीं
साफ़ दिल है खरी बात करते हैं हम
सिर्फ अपने ही आपे में रहते है हम
दुनिया फिर भी सताये तो क्या कीजिये
झूठी तोहमत लगाए तो क्या कीजिये

दोस्त हैं दोस्ती का दम भरते हैं दोस्त
जान से भी सगे अपने बनते हैं दोस्त
मौके पे जब भी लेकिन ज़रुरत पड़ी
पीछे के दरवाजे से खिसकते हैं दोस्त
दोस्त ऐसे सताएं तो क्या कीजिये
ज़ख्म दिल पर चलाएं तो क्या कीजिये

तुम जिओ और जीने दो हमको भी यार
अपना तुमसे नहीं है कोई सरोकार
हम जो बोलें तो आता नहीं है पसंद
और न बोलें तो समझो हमें है घमंड
ज़माना ऐसे सताये तो क्या कीजिये
चालें हम पर चलाये तो क्या कीजिये

हर किसी से जब नाज़ुक ये मन भर गया
हाथ में हमने अपने कलम ले लिया
कह सके न किसी से सुनाते हैं हम
दिल से आवाज़ तुमको लगाते हैं हम
सदा तुम तक न आये तो क्या कीजिये

आ भी जाओ कि अब आस मिटने लगी
ज़िन्दगी बोझ महसूस लगने लगी
तुम गए कर के वादा था कुछ रोज़ का
अब क़यामत भी नज़दीक दिखने लगी
वक्त पर तुम न आये तो क्या कीजिये
दम निकलने पर आये तो क्या कीजिये

आभीजा आभीजा आभीजा आभीजा
आभीजा आभीजा आभीजा आभीजा
डूबती साँसों की कसम है
तुझे इक बार चली आ
आभीजा आभीजा आभीजा आभीजा
आभीजा आभीजा आभीजा आभीजा
रुकते दिल की धड़कनों ने
दी सदा अब तोआभीजा
आभीजा आभीजा आभीजा आभीजा
आभीजा आभीजा आभीजा आभीजा
बनी पत्थर ये आँखें
मिलने की आस में आजा
आभीजा आभीजा आभीजा आभीजा
आभीजा आभीजा आभीजा आभीजा

इतने पर भी न आये तुम क्या कीजिये
मर गए बैठे बिठाये हम क्या कीजिये

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