हथेलियां रगड़ जगा देते थे जो आतिशें
ऐड़ियाँ रगड़ते हुए गए हमने देखा है
करम का लेखा है यहीं देना पड़ता है
शौक से कहिये कल किसने देखा हैरातों में जो थे चमकते वो तारे कहाँ हैं
हम तो बस उनका अक्स देख पाते हैं
जो बीत गया उसे क्यों कोई याद करे
करम हमारे मगर सवाल बन जाते हैंलोग जो नाज़ करते हैं खुशनसीबी पर
भूल जाते हैं कि सोना मिट्टी से है
चमक दमक जिस रोज़ ख़ाक होगी
नींद आखरी में सोना मिट्टी में हैंआँखों में जो चमक है बुझ जाएगी
बेज़ा होता है जागते हुए सोए रहना
उठो फिर से लिख डालो कहानी
तुम्हारे हाथों में है किरदार चुननादिल की बातों में न उलझ जाना कभी
हर रात के बाद नया दिन आता है जी
उम्मीद की किरने उजाले बिखरायेंगी
तारीखें फिर से नयी कहानियां सुनाएंगीलोग जो नाज़ करते हैं खुशनसीबी पर
भूल जाते हैं कि सोना मिट्टी से है
चमक दमक जिस रोज़ ख़ाक होगी
नींद आखरी में सोना मिट्टी में हैं