कांच के महल (Kaanch Ke Mahal)

तुम जो अपने ही ख्यालों में खोई रहती हो 
बेख्याली में खुद से ही बातें करती रहती हो

इल्म है! तुम किसी को अच्छी लगती हो
कोई है कि जिसने ख्वाब कई बुन रखे हैं
तुम्हें देने के लिए तोहफे उसने चुन रखे हैं
खिल जाता है जब भी उससे बात करती हो

इल्म है!  तुम किसी को अच्छी लगती हो 
हज़ार बातें हैं जो वो तुमसे कहना चाहता है
हर  सुख दुःख में संग वो  रहना चाहता है
कह नहीं पाता मगर जब रूबरू होती हो

इल्म है!  तुम किसी को अच्छी लगती हो
एक तरफ़ा इश्क़ के महल कांच के होते हैं
बनते है और एक पल में ही  तबाह होते हैं 
तुम क्या महल उजाड़ दोगी क्या कहती हो 
इल्म है न!  तुम किसी को अच्छी लगती हो

इल्म है! तुम किसी को अच्छी लगती हो
कोई है कि जिसने ख्वाब कई बुन रखे हैं
तुम्हें देने के लिए तोहफे उसने चुन रखे हैं
खिल जाता है जब भी उससे बात करती हो

इल्म है!  तुम किसी को अच्छी लगती हो 
हज़ार बातें हैं जो वो तुमसे कहना चाहता है
हर  सुख दुःख में संग वो  रहना चाहता है
कह नहीं पाता मगर जब रूबरू होती हो

इल्म है!  तुम किसी को अच्छी लगती हो
एक तरफ़ा इश्क़ के महल कांच के होते हैं
बनते है और एक पल में ही  तबाह होते हैं 
तुम क्या महल उजाड़ दोगी क्या कहती हो 
इल्म है न!  तुम किसी को अच्छी लगती हो

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