घायल शेर हैं बुज़ुर्ग (Ghayal Sher Hain Buzurg)

ज़िन्दगी के शिकार हुए ये घायल शेर हैं बुज़ुर्ग,
इनको सहलाओ, बहलाओ, ये चल पड़ेंगे ख़ुद।

कभी इनके साम्राज्य का डंका बजा करता था
परिवार कभी इनकी मुट्ठी में हुआ करता था

कभी जीत हर कदम इनके कदम चूमा करती थी
इनके इरादों से जंग की तकदीर लिखा करती थी

इन्हें मत समझो कमज़ोर, ये अनुभव की गागर हैं,
इनकी बातें, इनके किस्से, गागर में बंद सागर हैं।

इनके चेहरे पर झुर्रियाँ हैं, पर दिल में हैं उमंगें,
इनके संग रहकर देखो, मिलेंगी खुशियों की तरंगें।

इन्हें आदर दो, इन्हें मान दो, ये हमारे प्रेरक हैं,
इनके आशीर्वाद से ही, सब मुश्किलें आसान हैं।

ज़िन्दगी के शिकार हुए ये घायल शेर हैं बुज़ुर्ग,
इनको सहलाओ, बहलाओ, ये चल पड़ेंगे ख़ुद।

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