झक्कास (Zhakkaas)

ये भड़ास किसलिए ये प्यास किसलिए
तुम तो थे झक्कास तो बकवास किसलिए

तीन में तुम नहीं न हो तरह में
फंसे रहते हो न जाने किन फेरों में
कोड़ी की औकात बनते बॉस किसलिए

बजाती शक्ल बारह बोलो क्या ग़म है
लायक हो जिसके मिला क्या कम है
आपे से फिर होते हो बाहर किसलिए

ठंड रखो वर्ना पछताओगे एक दिन
गुस्से की आग में खुद जल जाओगे एक दिन
कोई दे देगा चपेट जाने दो यार किसलिए

क्या समझते हो तुमसे लोग डरते हैं
उम्र का तुम्हारी बस लिहाज करते हैं
मरे हो सांप फिर फुँफकार किसलिए

ये भड़ास किसलिए ये प्यास किसलिए
तुम तो थे झक्कास तो बकवास किसलिए

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