कैसे बचें गन्दगी से
मरेंगे सब बीमारी से

दुकानदार फुर्सत में बैठा
नाक में ऊँगली डालकर
देखते देखते चार पांच बाल
तोड़े और कर दिए बेघर

लाख खुदा से मिन्नत की
पोछ ले वो हाथ पैंट से ही
बेगैरत ने उसी हाथ से
दही की थैली पकड़ा दी

कहाँ से खोलूं थैली बापू
इतने हाथों की गन्दी ये
कैसे बचें गन्दगी से
मरेंगे सब बीमारी से

One Comment

  1. बेहतरीन कविताएं l
    कभी समय मिले तो बताना l
    कविता क्यों लिखी ये समझाना l
    क्यों आए तुम्हारी आँख में आँसू l
    और बन गई तुम्हारी कविता धांसू l
    एक अपना गीत तुम हमको सुनाना l
    कविता क्यों लिखी ये समझाना ll
    दीपेन्द्र दीपक

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