शहज़ादे यह तुमने क्या रायता फैला दिया
हमारी परवरिश का तुमने यह सिला दिया
पढ़ा लिखाकर तुम्हें हमने डॉक्टर बनाया
सोसाइटी में नाम और रुतबा दिला दिया
तुमने आज एक लड़की को घर बुला लिया
हमें शहंशाह अकबर खुद को सलीम
और इसे अनारकली फील करा दियासोचा था अब तनिक चैन की बंसी बजायेंगे
खुल्ला खर्च करेंगे हम काजू बादाम खाएंगे
बहुत हुआ अब तक मर मर कर जी लिए
बहुत दिन हुए हमें मौज़ मस्ती किए हुएहमारे अरमानों का तुमने यह सिला दिया
तुमने आज एक लड़की को घर बुला लिया
हमें शहंशाह अकबर खुद को सलीम
और इसे अनारकली फील करा दियाहमको लगा था यह जो घर की चारदीवारी है
हम ज़िल्ले-इलाही और यह सल्तनत हमारी है
अपने ढंग से रहते थे अपनी शर्तों पर जीते थे
कभी पानी में कभी सोड़े में कभी नीट पीते थेहमारी ख़्वाबगाह को चुटकियों में डहा दिया
तुमने आज एक लड़की को घर बुला लिया
हमें शहंशाह अकबर खुद को सलीम
और इसे अनारकली फील करा दियाशादी करना चाहते हो इससे तुम कहते हो
हमारे मंसूबों पर क्यों छुरी चलाते रहते हो
हमने तुम्हारा रिश्ता शाही घराने में किया था
चार पाहिया रथ का उन्होंने वायदा किया थाएक कुलीग को घर ला कर हमें हिला दिया
तुमने जो इस लड़की को है घर बुला लिया
हमें शहंशाह अकबर खुद को सलीम
और इसे अनारकली फील करा दियासाथ काम करती है तुम्हारे तो हमें क्या
हमसे बिना पूछे यों तुम फैसले लोगे क्या
मत भूलो घर और ये सल्तनत हमारी है
परवरिश तुम पर सुनो ये क़र्ज़ हमारी हैअपनी माँ जोधा को भी तुमने भुला दिया
तुमने आज एक लड़की को घर बुला लिया
हमें शहंशाह अकबर खुद को सलीम
और इसे अनारकली फील करा दिया