नौकझोंक (NaukJhonk)

नारी ऐसी होती है
नारी ऐसी होती है
शक करती है खुद
मर्द को संग डुबोती है
नारी ऐसी होती है
नारी ऐसी होती है

मर्द की फितरत होती है
नारी ऐसी होती है

मर्द की फितरत होती है
घरवाली हो साथ नज़र
बाहर की पे होती है
मर्द की फितरत होती है

नारी ऐसी होती है
मर्द की फितरत होती है

नारी ऐसी होती है
आदत मर्द की सारी
पहले गलत बताती है
यह मत पहनो यह मत
खाओ की रट लगाती है
बदल जाए मर्द तो
आंसूओं से फर्श भिगोती है
नारी ऐसी होती है

मर्द की फितरत होती है
नारी ऐसी होती है

मर्द की फितरत होती है
घर में बकरी बाहर
जाकर शेर हो जाता है
आँखें सेकता बाहर
घर में ढेर हो जाता है
टी वी मोबाइल में छिप
कर छुट्टी पूरी होती है
मर्द की फितरत होती है

नारी ऐसी होती है
मर्द की फितरत होती है

नारी ऐसी होती है
और लो और लो कहकर
खाना ठूंस खिलाती है
पेट निकल जाए तो
कह पीछे हट जाती है
‘पेट अपने की ज़िम्मेदारी
अपनी ही होती है’
नारी ऐसी होती है

मर्द की फितरत होती है
नारी ऐसी होती है

मर्द की फितरत होती है
जितना भी सज लो कभी
तारीफ़ न करता है
दरस पड़ोसन के करने
खिड़की पे टंगता है
पकड़ा जाए तो बोले
चाय की इच्छा होती है
मर्द की फितरत होती है

नारी ऐसी होती है
मर्द की फितरत होती है
नारी ऐसी होती है
मर्द की फितरत होती है
नारी ऐसी होती है
मर्द की फितरत होती है

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