वक्त के साथ (Vaqt ke Saath)

वक़्त के आगे कायनात भी मजबूर हो जाती है
इंसान चाहता नहीं मगर अनहोनी हो जाती है
दिल के रिश्तों के बीच दूरियां न आने दें हजूर
वक्त के साथ हर ज़ख्म की दवा हो जाती है

छोटी छोटी खुशियों को आँगन मैं सजा लो
बड़े सपनों के भंवर मैं न खो जाए जिन्दगी
ख्वाबों के हंसी सफर में साथ चलो तो सही
वक्त के साथ हर ज़ख्म की दवा हो जाती है

मुलाकात के सिलसिले बस यूँ ही चलते रहें
दिल-ए-ग़म को खुशियों की राहें मिलते रहें
दर्द की खामोशी में जो तुम साथ तो दो मेरा
वक्त के साथ हर ज़ख्म की दवा हो जाती है

धड़कनों में गूंजते हैं कुछ भूले बिसरे नग़मे
यादों के कारवां में ग़ुम हो गए हैं जो सपने
मोहब्बत की राह में हमसफ़र बन कर देखो
वक्त के साथ हर ज़ख्म की दवा हो जाती है

कुछ तो कहानियां हैं जो कहे बिना रह गयीं
हकीकत दिल की तह में दफ़्न हो रह गई
दिल के ज़ज़्बात तुम हमसे कह कर देखो
वक्त के साथ हर ज़ख्म की दवा हो जाती है

मुलाकात के सिलसिले बस यूँ ही चलते रहें
दिल-ए-ग़म को खुशियों की राहें मिलते रहें
दर्द की खामोशी में जो तुम साथ तो दो मेरा
वक्त के साथ हर ज़ख्म की दवा हो जाती है

वक़्त के आगे कायनात भी मजबूर हो जाती है
इंसान चाहता नहीं मगर अनहोनी हो जाती है
दिल के रिश्तों के बीच दूरियां न आने दें हजूर
वक्त के साथ हर ज़ख्म की दवा हो जाती है

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