सर्द सर्द रातों में

मार्टिन सूंघे हुए मच्छर की तरह पड़े
न जूनून है न तो जूं जो कानों पर रेंगे
न शर्म है हमें और न लिहाज़ कोई
है मज़ाल! कोई कहे हमें नहा ले धोले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
ठण्ड से दांत बजते हैं भाप मुंह से निकले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले

तौबा पानी से छू लो जो आह दिल से निकले
तौबा पानी से छू लो जो आह दिल से निकले
तौबा पानी से छू लो जो आह दिल से निकले
न नहाएंगे हम चाहे खंज़र सीने से निकले
तौबा पानी से छू लो जो आह दिल से निकले
न नहाएंगे हम चाहे खंज़र सीने से निकले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
ठण्ड से दांत बजते हैं भाप मुंह से निकले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले

खुमारी नींद की आँखों में न जगाओ हमको
ऑफिस जाने का ताना दो न उठाओ हमको
बद्दुआओं से डरो चैन ज़रा ले लेने दो
आज जी भरकर क़िबला हमें सो लेने दो
नाश्ता चाय यहीं भिजवा दो दुआ है दिल से
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
ठण्ड से दांत बजते हैं भाप मुंह से निकले
तौबा पानी से छू लो जो आह दिल से निकले
न नहाएंगे हम चाहे खंज़र सीने से निकले
नाश्ता चाय यहीं भिजवा दो दुआ है दिल से
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले

कोहरे की चादर में खर्राटे ले रहा है सूरज
कहाँ पश्चिम क्या इल्म और कहाँ है पूरब
चाहे मारो हमें गाली दो कलम सर कर दो
नहीं छोड़ेंगे आज बिस्तर कस ली है कमर
होके बेआबररू कूंचे से हम कहाँ निकले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
ठण्ड से दांत बजते हैं भाप मुंह से निकले
तौबा पानी से छू लो जो आह दिल से निकले
न नहाएंगे हम चाहे खंज़र सीने से निकले
नाश्ता चाय यहीं भिजवा दो दुआ है दिल से
होके बेआबररू कूंचे से हम कहाँ निकले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
ठण्ड से दांत बजते हैं भाप मुंह से निकले
तौबा पानी से छू लो जो आह दिल से निकले
न नहाएंगे हम चाहे खंज़र सीने से निकले
नाश्ता चाय यहीं भिजवा दो दुआ है दिल से
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले

कंपकंपाती ठण्ड पड़ती दिल्ली में
किटकिटाते दांत अपनी दिल्ली में
झंडेवालान से महरोली तलक
खूं जमाती ठण्ड अपनी दिल्ली में
उठो खाओ पियो सो जाओ फिर बिस्तर पे

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
ठण्ड से दांत बजते हैं भाप मुंह से निकले
तौबा पानी से छू लो जो आह दिल से निकले
न नहाएंगे हम चाहे खंज़र सीने से निकले
नाश्ता चाय यहीं भिजवा दो दुआ है दिल से
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
उठो खाओ पियो सो जाओ फिर बिस्तर पे

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
ठण्ड से दांत बजते हैं भाप मुंह से निकले

आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले
आज बिस्तर से न निकलेंगे चाहे दम निकले

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *