देव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते हो
जवाब न जिनका अपने पास ऐसे सवाल क्यों करते हो
पहले ही तुमसे हारे हैं खामखां क्यों अकड़ते हो
देव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते होतुम्हें सामने पाकर हम भीतर तक हैं सिहर जाते
जतन टोटके सिद्ध किये पर नंबर नहीं हैं आते
कोई बहाना नहीं फलता सब कहते हैं झूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते होदेव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते हो
जवाब न जिनका अपने पास ऐसे सवाल क्यों करते हो
पहले ही तुमसे हारे हैं खामखां क्यों अकड़ते हो
देव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते होछुटपन से ही नींद प्रभु जी तुमने हमरी उड़ाई है
सखा बंधुजन के समक्ष बस खिल्ली ही उड़वाई है
बापू से जो पड़े रोज़ तुम दस नंबर के जूते हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते होदेव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते हो
जवाब न जिनका अपने पास ऐसे सवाल क्यों करते हो
पहले ही तुमसे हारे हैं खामखां क्यों अकड़ते हो
देव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते होप्राइम नंबर फलां नंबर कहाँ समझ हमें आता है
तेरे कृपा दरबार में अपना नंबर नहीं लग पाता है
सर के ऊपर से जाते अपनी पहुंच से ऊँचे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते होदेव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते हो
जवाब न जिनका अपने पास ऐसे सवाल क्यों करते हो
पहले ही तुमसे हारे हैं खामखां क्यों अकड़ते हो
देव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते होसाइनथीटा कॉस थीटा ज्योमेट्री जो अलजेब्रा है
भेजे में नहीं समाता नंबर प्राइम क्यों तेरह है
रहम गरीब पे करो प्रभु ऐंठे किस के बलबूते हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते होदेव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते हो
जवाब न जिनका अपने पास ऐसे सवाल क्यों करते हो
पहले ही तुमसे हारे हैं खामखां क्यों अकड़ते हो
देव गणित बोलो भला किस बात पे आखिर रूठे हो
बुद्धि हमारी है छोटी या तुम मुश्किल कसूते हो
O Lord Mathematics, why are You so angry?
Why this silence, why this vanity?
Is my mind too small, or Your mercy too thin,
Why ask such questions no mortal can win?We face Your board with trembling pens,
Prayers rise higher than number tens.
We’ve tried the tricks, the hacks, the charms,
Yet still You strike with algebraic arms!
O Lord Mathematics, show some grace,
We’ve lost already—stop this chase!Since childhood days You’ve haunted dreams,
You’ve stolen peace with silent screams.
Our friends would laugh, our fathers shout,
“Can’t you solve this sum, you lout?”
A ten-mark beating every night,
O Lord Mathematics, have You no light?
Our sleep You stole, our peace You slew,
O merciless master—what did we do?Prime numbers smirk, they never end,
Fractions twist, the figures bend.
You sit on high, in theorem throne,
While we mere mortals weep alone.
Why raise equations, tall and sly,
When even logic forgets to fly?
O Lord Mathematics, why this pride,
When even You can’t simplify the divide!Sine and Cos—the cursed pair,
Geometry’s trap, algebra’s snare!
Thirteen’s prime—but why, O why?
You smirk and shrug, “Just multiply.”
Have mercy, Lord, on minds so frail,
Our neurons burnt, our patience pale!
Grant us peace, or partial grace,
Before we fail this cosmic case.O Lord Mathematics, we bow, we plead,
Subtract our sorrow, divide our need.
Your formulas float like holy smoke,
Your decimals dance, our brains just choke!
Forgive our sins, curve our grade,
You’ve won, O Lord, the joke is made.
We are fools in Your numeric hall,
O Lord Mathematics—have mercy on a