अंधभक्त

मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा

गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना

मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा

गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना

बाहर जो दुनिया है तो हो ठेंगे पर मेरे

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुझे बाहर मत निकालो वर्ना मर जाऊँगा

मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा

गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना

बाहर जो दुनिया है तो हो ठेंगे पर मेरे

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुझे बाहर मत निकालो वर्ना मर जाऊँगा 

मेरे पुरखे यहाँ जन्मे पीढ़ियों की सोच है

अक्ल मुझमें है बहुत तुम्हारी में खोट है

समझाते मुझे हो क्या बदल नहीं जाऊँगा

नाली में बस रहूँगा मैं कहीं नहीं जाऊंगा

मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा

गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना

बाहर जो दुनिया है तो हो ठेंगे पर मेरे

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुझे बाहर मत निकालो वर्ना मर जाऊँगा

जबरन निकाल कर  जो मुझे नहलाओगे

साबुन शैम्पू से जो मैल मेरा धुलवाओगे

कसम है तुम्हें खुदा की ख़ाक हो जाऊँगा

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा

गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना

बाहर जो दुनिया है तो हो ठेंगे पर मेरे

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुझे बाहर मत निकालो वर्ना मर जाऊँगा

आगे ले जाने वाली नयी सोच तुम्हारी

मुबारक बड़े बंगले तुम्हें फुलवारी तुम्हारी

गटर अपना छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा

गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना

बाहर जो दुनिया है तो हो ठेंगे पर मेरे

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुझे बाहर मत निकालो वर्ना मर जाऊँगा

ब्रह्मज्ञान पेलकर जो समझाते रोज़ मुझे

फ़िज़ूल बातों से टेंशन दे जाते हो मुझे

सोचते हो यूँ क्या मैं बदल जाऊँगा

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा

गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना

बाहर जो दुनिया है तो हो ठेंगे पर मेरे

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुझे बाहर मत निकालो वर्ना मर जाऊँगा

नाली गन्दी है तो मैल इसमें तुम्हारा है

तुम्हारे ऐबों ने ही जीवन मेरा संवारा है

तुम रहोगे मैल होगा होगी नाली भी वहीं

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा

गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना

बाहर जो दुनिया है तो हो ठेंगे पर मेरे

नाली में मैं रहूँगा कहीं नहीं जाऊंगा

मुझे बाहर मत निकालो मैं मर जाऊँगा

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