अधजली लकड़ी सुलगती यादें (Adhjali Lakdi Sulagti Yaaden)

गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयी
लाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी
कर लो तैयारी दफ़्न कर दो बचपन मेरा
लाश कांधों पे जाती नहीं उठायी गयी
गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयी
लाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी

ये था चूल्हा जिस पर माँ पकाती थी रोटी
अधजली लकड़ी सुलगाते यादें पायी गयी
माँ के आंचल से खेलता एक बच्चा मिला
बच्चे को जबरन माँ सुलाते हुए पायी गयी

गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयी
लाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी

सुलगी अंगीठी पर हाथ सेंकते बच्चे देखे
पिता से कहानियां सुनती टोली पायी गयी
बाल्टी के पानी में डूबे चंद ख़रबूज़े मिले
पापा लाये हैं खा लो! कहते माँ पायी गयी

गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयी
लाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी

खेलने आये थे आंगन में पडोसी बच्चे
आवाज़ आयी चाची की सकपकायी हुई
दम तोड़ते हुए खिलोने भी कुछ निकले
सजी गुड़िया मिली एक नयी ब्याही हुई

गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयी
लाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी

नन्हे जूते छोटे कपड़े कई कतरनें थीं
लिखने से हुई लाचार पेन्सिलें पायी गयी
चूड़ियां टूटी और चिमटियों के अवशेष
सभ्यता मानो एक जीते हुए पायी गयी

गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयी
लाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी

माँ के लिए रोता हुआ गाय का एक बछड़ा
माँ बिछड़ी कि पलट कर कभी आयी नहीं
कटे शहतूत की जड़ें जैसे हो नाग कोई
बदला लेने को फैन मारते हुए पायी गयीं

गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयी
लाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी
कर लो तैयारी दफ़्न कर दो बचपन मेरा
लाश कांधों पे जाती नहीं उठायी गयी

गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयी
लाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी

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