आर्यवर्त की प्रतिभा (Aaryvart Ki Pratibha)

छोटी उम्र में सब बच्चे प्रतिभाशाली लगते हैं
अपनी चतुराई से वे मुश्किल करतब करते हैं
मगर बड़े होकर वे ही नौकरी ढूढ़ते रहते हैं
अपनों के और गैरों के सबके ताने सहते हैं
यह सिस्टम की नाकामी या कर्मों का लेखा है
आर्यवर्त में प्रतिभा को तिल तिल मरते देखा है

घुट घुट कर सिसक सिसक चुप आहें भरते देखा है
आर्यवर्त में प्रतिभा को तिल तिल मरते देखा है

विद्वान् कह गए आवश्यकता आविष्कार की जननी है
असलियत में आवश्यकता प्रतिभा को छलनी करती है
कितने सपने कितने अरमान रोज़ यहाँ कुचले जाते
संग अपनों के तंज़ गहरे और गहरे होते जाते
यह सिस्टम की नाकामी या किस्मत का लेखा है
आर्यवर्त में प्रतिभा को तिल तिल मरते देखा है

घुट घुट कर सिसक सिसक चुप आहें भरते देखा है
आर्यवर्त में  प्रतिभा को तिल तिल मरते देखा है

शिक्षित नौकर बनते हैं मूरख राज चलाते हैं
पढ़े लिखे अनपढ़ मालिक का आदाब बजाते हैं
शिक्षा बिके बाज़ारों में प्रतिभा भटके सड़कों पर
पढ़लिख कर क्या हासिल जब फिरना है रस्तों पर
यह सिस्टम की नाकामी या भ्रष्ट तंत्र का लेखा है
आर्यवर्त में प्रतिभा को तिल तिल मरते देखा है

घुट घुट कर सिसक सिसक चुप आहें भरते देखा है
आर्यवर्त में प्रतिभा को तिल तिल मरते देखा है

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