आईना हूँ में तेरा
हर अदा को तेरी देखा है
कौन देखेगा इतना तुझे
जितना मैंने देखा हैइतना कौन संवारेगा
जितना मैंने संवारा है
तेरे हर रूप को मैंने
इन नज़रों से सराहा हैयाद है क्या जब मेरे
सामने बनती संवरती थी
इतराती थी खुद पर
जब बेजा हंसी रहती थीएक सावन ऐसा आया
बागिया में थे फूल खिले
मेरे सामने आई थी तुम
बालों में फूल पिरोये हुएउस सावन की बारिश क्या
नये रंग बिखरा गई थी
कली थी तुम वो तुमको
कली से फूल बना गई थीतुझे सजाते हर पल को
नज़रों में कैद कर रखा है
बंद कली से मैंने तुझे
गुलाब में खिलते देखा हैआईना हूँ में तेरा
हर अदा को तेरी देखा है
कौन देखेगा इतना तुझे
जितना मैंने देखा हैइतना कौन संवारेगा
जितना मैंने संवारा है
तेरे हर रूप को मैंने
इन नज़रों से सराहा है