होगा तू कहीं का आतंकी जो भी हो मंसूबा तेरा
कायर की तरह छिपकर चोरी से आता क्या ईमान तेरा

रात के घोर अँधेरे में तू वार निहत्थों पर करता
हथियार के बल है दुस्साहस वर्ना तुझसे ठेंगा डरता
मासूमों की आड़ में छिप बैठा छद्म खेल तू खेल रहा
चूहे की मौत मरेगा एक दिन अंत भी तुझसे खेल रहा
मेरे देश की मिटटी लगा माथे पर हो उद्धार तेरा

होगा तू कहीं का आतंकी जो भी हो मंसूबा तेरा
कायर की तरह छिपकर चोरी से आता क्या ईमान तेरा

तुझसे पहले भी कई कायर आये और आकर लटक गए
तुझे उन लोगों की शै है जो अपने ही मुल्क में भटक गए
यह देश का मेरे बड़प्पन है दुश्मन से मुहब्बत करता है
तेरे आका की फितरत है सदा वार पीठ पर करता है
भारत की इतनी क़ूवत है कुचलेगा फन ऐ नाग तेरा

होगा तू कहीं का आतंकी जो भी हो मंसूबा तेरा
कायर की तरह छिपकर चोरी से आता क्या ईमान तेरा

भाग ले जितना भाग सके और कब तक खैर मनाएगा
आत्मघात तेरी मुक्ति है वर्ना आका मरवाएगा
जिन लोगों का तू कातिल है वो बेक़सूर थे गुज़र गए
बेगुनाह थे मारे तूने परिवार भी संग संग बिखर गए
मौत से पहले कई सवाल पूछेगा ज़रूर ज़मीर तेरा

होगा तू कहीं का आतंकी जो भी हो मंसूबा तेरा
कायर की तरह छिपकर चोरी से आता क्या ईमान तेरा

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