राख से बने हम राख की तरह जले
राख बनकर ही चले जाना है सजन
कुफ्र मत तोलो खुदा के पास जाना है
मुंह छिपाना या मुंह दिखाना है सनमछोड़ दी थी दुनिया की तमन्ना हमने
सफर में रहे छोड़ मंजिल की चाहत
नया मोड़ आया हर जब मुकाम पर
मजबूर ये दिल हुआ याद आये बंधनराख से बने हम राख की तरह जले
राख बनकर ही चले जाना है सजन
कुफ्र मत तोलो खुदा के पास जाना है
मुंह छिपाना या मुंह दिखाना है सनमदुनिया की सजिशों मेंकभी न उलझे
सत्य की राह में किया सब समर्पण
राख के ढेर में चिंगारी की तरह
सुलगाते रहे मन तन और बदनराख से बने हम राख की तरह जले
राख बनकर ही चले जाना है सजन
कुफ्र मत तोलो खुदा के पास जाना है
मुंह छिपाना या मुंह दिखाना है सनम