कौन कहता है कि सुनता नहीं खुदा
खुदी को भूल कर तू हाथ उठा
दुआ में अपना सर तो झुका
चल उठ कर देख तेरे गुनाहों को वो बख्श देगा
उम्मीद के अंकुर को मौला फिर से सींच देगावो है तेरे साथ जब तक कोई परवाह न कर
अंधेरों में भी राह दिखा देगा तुझको ये शजर
कभी मत सोच कि तू है अकेला इस दुनिया में
तेरे हर आंसू का हिसाब रखता है वो जो ऊपर बैठातू हिम्मत रख तू विश्वास रख
तेरी रूह में वो है मजबूत यह एहसास रख
हर गुनाह बख्श देना ही है उसका है मकसद
तू एक कदम बढ़ा बाकी छोड़ दे उसकी रहमतमंजिल की राह यूँ तो नहीं आसान
रास्ते में ही मगर हार मत मान
जो गर तूझे उस पर विश्वास
तेरी जीत होगी का बजेगा एक दिन कोई तासजो साथ तेरा खुदा हो तो फिर किस बात का डर
तेरे हर ख्वाब को कर देगा वो एक दिन साकार
हर मुश्किल को पार कर तू एक नई राह जोड़
खुदा का नाम ले और बन कर तू बेमिसाल सोने का मोड़तू हिम्मत रख तू विश्वास रख
तेरी रूह में वो है मजबूत यह एहसास रख
हर गुनाह बख्श देना ही है उसका है मकसद
तू एक कदम बढ़ा बाकी छोड़ दे उसकी रहमत