समय देख कर उठते हो
बैठते सोते जगते हो
घड़ी से ही पूछ कर
धोते नहाते खाते हो
जरा देर हो जाए तो
बेचैन तुम हो जाते हो
ख्वामखां ही बेवजह
अपना खून जलाते हो
बी पी बढ़ाये जाते हो
जिंदगी को जंग दिन को
घड़ियाल बना रखा है
कुछ लेते क्यों नही अपना
क्या हाल बना रखा हैकायदा का फ़ायदा
हमको समझ नहीं आता
हाल तुम्हारा हमसे
बेहतर नहीं ज़्यादा
एक फ़र्क साफ है कि
हम बिंदास हंसते रहते है
और जनाब के
तोते उड़े रहते हैं
कयादे आजम क्या
बबाल मचा रखा है
कुछ लेते क्यों नही अपना
क्या हाल बना रखा हैबार बार बेइज्ज़ती का
जो ज़हर रोज पिलाते हो
अपनी कामयाबी के
जो झंडे गढ़वाते हो
दिल पर हाथ रख कर
जरा याद करना
पिछली बार हुआ था
कब खुलकर हसना
कायदा मे मौत
मस्त मौला की मोज है
फटी धोती से तुमने
रुमाल बना रखा है
कुछ लेते क्यों नही अपना
क्या हाल बना रखा है