ख्वाब सा लगता है तेरा हमसे यूँ मिल जाना
हकीकत में तो ये मुनासिब नहीं
उतर आयी है आसमां से जो मेरे लिए
शहज़ादी परियों की वो कहीं तू तो नहींसोचते रहते थे हम यूँ ही सोचा करते थे
यूँ हमसफ़र के संग होते हैं सभी के
गुज़र जाएगी तनहा क्या रातें यूँ ही अपनी
दिन ज़िंदगानी के अपने क्या बदलेंगे कभी येख्वाब सा लगता है तेरा हमसे यूँ मिल जाना
हकीकत में तो ये मुनासिब नहीं
उतर आयी है आसमां से जो मेरे लिए
शहज़ादी परियों की वो कहीं तू तो नहींकिस्मतों पे यकीं अब होने लगा है
साथ मिला है हमें जब से तेरा जाना
ख्वाब सा लगता है तेरा हमसे यूँ मिल जाना
हकीकत में तो ये मुनासिब नहींअनजान राहों पर अजनबी लोगों में से
कोई एक चेहरा है अपना नज़र आया
दिल का यक़ीं वो बनता गया
जैसे करीब आया वो जब हमने आज़मायाचौदहवीं के चाँद जैसा है मेरा महबूब
ऐ चाँद तेरी अब ज़रुरत नहीं
ख्वाब सा लगता है तेरा हमसे यूँ मिल जाना
हकीकत में तो ये मुनासिब नहीं