चाय की मलाई (Chay Ki Malai)

मलाई तो मलाई है सबने ही खायी है
मुझे भी पसंद बहुत वैसे तो मलाई है
पर क्यों मलाई चाय पे पड़ आई है
धोखे से चाय के घूंट में चढ़कर
होठों से लटक कर गले तक आयी है
चाय की मलाई तू किस काम आयी है

होठों से लटके तू मुंह आप झुक जाए
बूंद टपके सीधे कपड़ों पर गिर जाये
बेचारे बन्दे को कुछ समझ न आये
किस विधि मलाई को अंदर ले जाए
जिस गले पड़ी उसने आँख न मिलाई है
चाय की मलाई तू किस काम आयी है

चाय की चुस्की का रास्ता तू रोके
सनम बेवफा सी दे जाती है तू धोखे
किसी किताब में ज्ञान नहीं न गुरुमंत्र
साफ़ कैसे करे तुझे कोई कैसे पोंछे
रुमाल के काबू में भी तू नही आई है
चाय की मलाई तू किस काम आयी है

चाय तो महफ़िल की शान होती है
अच्छे संस्कार की पहचान होती है
वक़्त बेवक्त तू होठों से चिपककर
बोलते की बोलती बंद कर देती है
चौड़े में तू खिल्ली उड़वाती आई है
चाय की मलाई तू किस काम आयी है

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