कॉलोनी में कुटिया ने पांच बच्चों को जन्म दिया
दर्द लिया दर्द सहा उसने मगर उफ़ नहीं कियापड़ौस की आंटी ने उन पर दरियादिली दिखाई
माँ और सब बच्चों के प्रति ज़िम्मेवारी दिखाईगले में सब के नीले रंग के पट्टे बाँध दिए गए
बची रोटी और दूध के भण्डार खोल दिए गएआंटी हर दिन खाना और दूध परोस जाती थी
कुतिया बच्चों की ओर से निश्चिन्त सो जाती थीइंसानी फितरत मगर जानवर नहीं समझता है
एक रोटी डाल कर भाग्य विधाता बन जाता हैअगले रोज़ आंटी बच्चों का सौदा कर रही थी
कुतिया विश्वास के चलते बेफिक्र सो रही थीबच्चों की ज़िन्दगी एक नयी करवट ले रही थी