तुझसे बढ़कर मेरा कोई महबूब नहीं
तेरे बिना ऐ मेरे ख़ुदा मेरा वजूद नहीं
तेरे ही हाथों में क़ाबिज़ मेरी लगाम है
तेरे नाम सुबह शाम और क्या काम है
सच का है तुझसे वास्ता कोई झूठ नहींएक उम्र बाद समझ में आया कि सच क्या है
तेरी राह में चलकर पाया कि प्यार क्या होता है
तेरे बिना दिन के रोशनी ना देखने के बराबर है
तेरे बिना हर नींद अंधेरे में चलने जैसा है
मैं तेरी गलियों में रोज़ तेरे ख़्वाब ओढ़ आता हूं
तुझसे बढ़कर मेरा कोई महबूब नहींतेरे बिना ऐ मेरे ख़ुदा मेरा वजूद नहीं
तेरे ही हाथों में क़ाबिज़ मेरी लगाम है
तेरे नाम सुबह शाम और क्या काम हैसच्चा है जब से पास तू असली में तभी से हूं
अर्यूलंदज़ में नक्श तू केरण्ते मैं तेरा हुरूफ़ हूं
तुझसे रिश्ता नेह का दिल का सौदा हवा है
तेरे जैसा हमसफ़र किसी को ना मिला
बिन तेरे दूर रहूं न ऐसा कोई जहांतुझसे बढ़कर मेरा कोई महबूब नहीं
तेरे बिना मेरे खुदा मेरा वजूद नहीं
तेरे ही हाथों में क़ाबिज़ मेरी लगाम है
तेरे नाम सुबह शाम और क्या काम हैतेरे बाद समझ में आया कि सच क्या है
तेरी राह में चलकर पाया कि प्यार क्या होता है
तेरे बिना दिन के रोशनी ना देखने के बराबर है
तेरे बिना हर नींद अंधेरे में चलने जैसा है
मैं तेरी गलियों में रोज़ तेरे ख़्वाब ओढ़ आता हूं
तेरे जैसा हमसफ़र किसी को ना मिलाबिन तेरे दूर रहूं न ऐसा कोई जहां
तुझसे बढ़कर मेरा कोई महबूब नहीं