बारिश में मन खिल खिल जाय
चलो चलो कहीं सैर पे जायें
सड़क किनारे घुमें बैठें
पियें नुक्कड़ वाली चायअदरक की सोंधी महक लिए
बनती जब मनभावन चाय
खुशबु इलाइची की आये
पियो गरम होठ जल जाये
सुड़ुप सुड़ुप कर पी डालो
गला साफ़ दिल खुश हो जाएसाथ पकौड़े हों तो भई वाह
खालो पेट चाहे निकल आयेबारिश चाय पकोड़े का संगम
मन के दरवाज़े खुल जाएँ
तो क्यों हो जाए फिर
नुक्कड़ की एक कटिंग चाय