मिलने और बिछड़ने में है एक पल का फासला
पल में हम मिल गए पल ही में हो जायेंगे जुदा
बिछड़ गया है जो आज कोई बन्दे रोता है क्या
एक रोज़ जब हो जाना है खुद ही से तुझे जुदा
खींचता हाथों पर लकीरें आसमां पर बैठा खुदा
कौन किस से कब मिलेगा और कब होगा जुदा
खौफ था आँखों में जब जहाँ से वो रुखसत हुआ
अब जो बिछड़े कब मिलेंगे हो रहे जो अपने जुदा
खाक है ये जिस्म खाक एक दिन हो ही जायेगा
रूह तेरी उड़ चलेगी जिस वक सदा देगा खुदा
एक पल में लिख दी ज़िन्दगी दूजे में लिखी मौत है
दो पलों के फासले पर गौर फरमा बैठा है खुदा