ना! मैं तुमसे कोई बात नहीं करूंगा
मन के ठहराव पर घात नहीं करूँगा
ना जाने कौन सी रचना यहां आ बैठे
तितली खिलते फूलों पर आकर बैठें
तुम्हें देखकर कहीं वह डर न जाए
मन चमन की खामोशी न मर जाए
मैं मन में कोई उत्पात नहीं करूंगा
ना! मैं तुमसे कोई बात नहीं करूंगा
बमुश्किल बग़ीचे में बहार आई है
फूलों ने खिल नयी शोभा बनाई है
तूफानों के अनगिनत वार झेले हैं
परतों परत खोद मिटटी हटाई है
शांति में मैंने एक कुटिया बनाई है
रहूंगा यही अब नहीं साथ चलूंगा
ना! मैं तुमसे कोई बात नहीं करूंगा
ना! मैं तुमसे कोई बात नहीं करूंगा
मन के ठहराव पर घात नहीं करूँगा