निकल चलो यारों के संग (Nikall Chalo Yaaron Ke Sang)

मुश्किल है फुर्सत मशरूफियत के दौर में
निकल चलो यारो गुज़ारें कुछ दिन बैंगलोर में
बैठेंगे बगीचों में हम लेंगे चाय की चुस्की
होगी ढेर सारी बातें जम कर मोज़ मस्ती

यादें ताजा करेंगे तंग गलियों में घूमकर
यशवंतपुर में करेंगे शॉपिंग हम जमकर
लाल बाग़ में देखेंगे हम प्यारे प्यारे फूल
ठंडी हवा के झोंके में हम हो जाएँ कूल

फन वर्ल्ड में फन करो यारो
खाओ पीओ मज़ा करो
जानवरों को देखो ज़ू में
टपरी वाली चाय पियो

आईटी हब की चमक दमक हमें लुभाती
हल्की बारिश की बूंदें रुमानी पल सजाती
कोने-कोने में है कहानी रोज़ नई अंजानी
मिल जाती हर मोड़ पे कोई सौगात पुरानी

ढलते सूरज की छांव में पकड़ो हाथ हाथों में
गूंजते गीतों में खो जाओ प्यार की बाहों में
पहाड़ियां
ताल
और बगीचों में रंग बिखेर दो
बैंगलोर की फ़िज़ां में सब वादे पूरे कर लो

फन वर्ल्ड में फन करो यारो
खाओ पीओ मज़ा करो
जानवरों को देखो ज़ू में
टपरी वाली चाय पियो

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