खाली पड़े मकान में जो
किराये के लिए था गया छोड़ा
रहने लगा उस मकान में
दो पंछियों का एक जोड़ा

किराया नहीं देते थे!

रहने लगे वो प्यार में
अपने छोटे से घर संसार में
दाना चुगने बाहर जाते
शाम हुए घर लौट आते

वक्त गुजरा उन्हें साथ रहे
चिड़िया ने दो अंडे दिए
अण्डों को जब वे सेने लगे
बच्चे सपनों में आने लगे

वक्त और गुज़रा, देना ध्यान
किराये पर चढ़ गया मकान
दो बच्चों का एक परिवार
घर में आये किरायेदार

वे किराया देते थे!

नया परिवार जब रहने आया
साफ़ सफाई का दौर चलाया
पंछियों को डरा कर भगा दिया
अण्डों को घर से हटा दिया

दो पंछी जोड़े में थे, अंडे भी थे
दो प्राणी परिवार में, बच्चे भी थे
प्रकृति का कोई फर्क नहीं था
फर्क सिर्फ हैसियत का था

माया का गुणगान करें
या किस्मत का दें हवाला
समर्थ एक परिवार ने
निरीह एक परिवार को
बेघर करके घर से निकाला

मकान मालिक है पूंजीवाद
किरायेदार है ताकतवर सत्ता
बच्चे हैं सत्ताभोगी राजनेता
पंछी रह गयी कमज़ोर जनता
और फूटे अंडे हैं लोकतंत्र

सभ्यताएं ऐसे ही पनपती हैं
तंत्र ऐसे ही चला करते हैं
मत भूलो, अमीरों के बच्चे
नौकर के हाथों पला करते हैं

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