जीवन की आपाधापी में
फुर्सत के पल ढूंढता है दिल
अपने पीछे छूट गए हैं
गैरों में प्यार ढूंढता दिलबेहतर जीवन की खातिर
दूर देस हम आये थे
खेत बेच कर पुश्तैनी
रुपये हमने जुटाए थे
भाईचारा खोज रहे
हम भी कैसे दीवाने है
गाँव में थे सब अपने
अब अपने भी बेगाने हैं
बेगानी बस्ती में बन अब्दुल्ला
गया पागल दिलजीवन की आपाधापी में
फुर्सत के पल ढूंढता है दिल
अपने पीछे छूट गए हैं
गैरों में प्यार ढूंढता दिलएक हमसफ़र मिला था
वो भी धोखा दे गया
खोखले रिश्तों से जब से
कोमल दिल मैला हो गया
कई दफा समझा कर हारे
लाखों बार दुहाई दी
आज भी हर परछाई में
उसका निशां ढूंढता दिलजीवन की आपाधापी में
फुर्सत के पल ढूंढता है दिल
अपने पीछे छूट गए हैं
गैरों में प्यार ढूंढता दिलकोई नहीं हमदर्द कि जिससे
दिल का दर्द बताएं हम
दवा कोई अपनी कर दे
ज़ख्म उसके सहलाएं हम
आदत से मजबूर हुए हैं
चोट पे बस हॅंस लेते हैं
ग़म के दरिया में डूबा
तिनके का सहारा ढूंढता दिलजीवन की आपाधापी में
फुर्सत के पल ढूंढता है दिल
अपने पीछे छूट गए हैं
गैरों में प्यार ढूंढता दिल