भानमती का कुनबा (Bhaanmati Ka Kunba)

कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा
भानमती ने कुनबा जोड़ा
इसमें कुनबा है नालायक
भानमती का दोष नहीं
कुनबे से वो जुड़ी इसलिए
क्योंकि ब्याह कर आयी थी

असल में तो यह रंग है
हमारी प्रशासनिक व्यवस्था का
जहाँ बेचारे नौकरशाहों पर
नायलक कुनबा थोपा जाता
उनको अपने विभाग में
सक्षम कर्मचारी चुनने का
चुनने का अधिकार नहीं है
बल्कि औड़म बौड़म कर्मचारी
उन पर थोप दिए जाते हैं

जिससे न तो काम की
और न ही नए तरीकों को
अपनाने की संभावना
शेष बचती है और बेचारा अफसर
अच्छे नतीजों की चाह लिए
बस संघर्ष करता रहता है

इसलिए सही कहावत कुछ ऐसे है

कहीं की ईंट कहीं से ले रोड़ा
ऊटपटांग सा कुनबा जोड़ा
भानमती को उसमें बिठाया
बेचारी को कहीं का न छोड़ा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *