मजदूर दिवस (Majdoor Diwas)

मजदूर दिवस छुट्टी का दिन रमुआ बोला जय हो
बीवी बोली छुट्टी में अरे नाटकहै क्या ये नया हो

बोला रमुआ मई डे है आज सुन बच्चों की माई
दिन-रात खटते हैं तनिक मौज बनती है भाई

नहा-धोकर पहनूंगा लुंगीऔर टोपी बटर वाली
नहीं करूँगा झाड़ू-पोंछा न धोऊँगा कोई थाली

बीवी बोली वाह जी तुम तो भले मजदूर कहाये
घर के काम रोज करें हम हम भी तो उकताए

रमुआ बोला आज हमें सिर्फ आराम चाहिए
कुर्सी चाय के संग पकौड़े बस यही चाहिए

बीवी ने चाय बनाई पकौड़े लेकिन गायब थे
रमुआ पूछा कहाँ पकोड़े आया जवाब मई डे

यारो मेहनतकश है जो मज़दूर कहलाता है
हँसी कभी पसीना पर देश वो ही चलाता है

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