तुम पर मैं क्या गुज़रा हूँ
मैं तो खुद से ही गुज़रा हूँ
जो एक पल को ठहरा था
जाता हुआ मैं वो लम्हा हूँ
कोई कहता मुझे वक्त बुरा
एक ज़िंदगी को मैं ले डूबा
कोई इठलाता मेरे होने पर
मेरी सांगत में महबूब मिला
किस्मत किसी की जग गयी
लॉटरी किसी की लग गयी
घर में हुए किसी दो से तीन
दुनिया किसी की उजड़ गयी
क्या मतलब ऐसी बातों से
मैं आया था बस गुजर गया
मैं विधि का एक टुकड़ा हूँ
तुम पर मैं क्या गुज़रा हूँ
मैं तो खुद से ही गुज़रा हूँ
जो एक पल को ठहरा था
जाता हुआ मैं वो लम्हा हूँ
अच्छा हूँ या था मैं बुरा
कोई बैर न रख न नैन चुरा
सोच तुम्हारी तुम जानो
समझो अपना या ठुकराओ
वक्त तुम्हारा भी होगा
ऐसे भरम तुम ही पालो
अपनी धुन गुनगुनाऊँ मैं
मुझे अनवरत बह जाने दो
सफलताएँ सब सर माथे
असफलता सर फिर मेरे क्यों
तुम पर मैं क्या गुज़रा हूँ
मैं तो खुद से ही गुज़रा हूँ
जो एक पल को ठहरा था
जाता हुआ मैं वो लम्हा हूँ
भूत भविष्य में उलझे तुम
कैदी होनी अनहोनी के तुम
चाल सितारों की गिनकर
सब अपनी चालें चलते तुम
कोई नयी पहचान न दो
मैं लम्हा हूँ लम्हा समझो
पल प्रतिपल में खंडित मैं
खुद को जोड़ता रहता हूँ
तुम पर मैं क्या गुज़रा हूँ
मैं तो खुद से ही गुज़रा हूँ
जो एक पल को ठहरा था
जाता हुआ मैं वो लम्हा हूँ