मेरी नज़र से न दुनिया को देखो
जहां ये तुम्हारा यूं ही चलेगा
गुजर जाएंगे दिन मेरे गम के ये भी
मुकद्दर तुम्हारे कदम चूम लेगा
मैं चल दिया हुं जो सफर अहले जन्नत
है आखिरी अंजाम ये हर किसी का
दो आँसु बहाये हैं मेरी मोत पर जो
नाता यही है आदम से आदमी का
दिल में बहुत कुछ था कहने को यारो
कोई संगं न था तो किसको सुनाते
पतझड़ के सुखे पत्तों की मानिंद
सरसराहट के बीच जैसे कुचले जाते
मेरे बिछड़ने का ना गम दिल पे लेना
अच्छा या बुरा हिसा था मैं तुम्हारा
मय्यत में मेरी ऐ शमिल ज़माने
अलविदा मैं चला शुक्राना तुम्हारा