श्रमेव जयते (Shramev Jayte)

हरे भरे गुलशन में देखो नित नए नए से रंग दिखे
कलियाँ कुछ फूलोंके रूप में फूल फलों में बदले

सबके दिलों को खूब लुभाती सुंदरता उपवन में खिले
प्रकृति का यह स्वरूप ही मानव को भगवान लगे

उन पेड़ों का क्या कहिये जो बढे मगर फल न लगे
माली ने सींचा था सबको कि सब पौधे फूलें फलें

श्रम का तू ईनाम भुला दे माली फ़िक्र क्यों करता है
परिश्रम का परिणाम सदा नहीं सुखदायी होता है
मन में रख गीता में अर्जुन को श्रीकृष्ण के प्रवचन
कर्मण्येवाधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचनः

क्या हुआ तेरे कर्मों को जो पहचान नहीं मिली
कल सफलता की किरणें तुझ पर ही केंद्रित होंगी

रख भरोसा औज़ार पर धार लगा तज उलझन
तेरी मेहनत के फल लगेंगे हरा भरा होगा उपवन

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