सखी री.. (Sakhi Ri)

सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै
निस दिन जतन करूँ मुआ किन्तु झांसे में नहीं आवै
सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै

पढ़ी लिखी साधारण मैं तो जुगाड़ से लग गयी थी
ब्यूटीफुल परमोशन के कई पायदान चढ़ गयी थी
कासे कहूं व्यथा जिया की सखी काम मोहे न आवै

सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै
निस दिन जतन करूँ मुआ किन्तु झांसे में नहीं आवै
सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै

पिछला बॉस कहा कहूं सखी पूरा मेरी मुट्ठी में था
औरों से काम ले लेता था वह जो मेरी ड्यूटी में था
नया बॉस सरफिरा है अपने काम से काम ही राखै

सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै
निस दिन जतन करूँ मुआ किन्तु झांसे में नहीं आवै
सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै

आदत नहीं काम करने की किस विधि पार लगाऊं
जी करे छोड़ छाड़ के सब मैं वी-आर-एस चली जाऊं
बड़े खर्च सब गले पड़े हैं मन व्याकुल अति अकुलावै

सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै
निस दिन जतन करूँ मुआ किन्तु झांसे में नहीं आवै
सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै

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