हम ग़ज़ल हो गए (Ham Gazal Ho Gaye)

इश्क़ का यह कौन सा दयार है
कि हम ग़ज़ल हो गए
पानी की बूँद को मोती बनाकर
हम तो कमल हो गए

इश्क़ का यह कौन सा दयार है
कि हम ग़ज़ल हो गए

चुप रहे होठ सी लिए हमने
किसी से कुछ कहा नहीं
उमड़ते तूफां हम पी गए
अश्क बहाया एक नहीं
किसी की परवाज़ की खातिर
गिरे धरातल हो गए

इश्क़ का यह कौन सा दयार है
कि हम ग़ज़ल हो गए

महफ़िल सजी थी हर किसी से
मुस्कुरा कर तुम मिले
सजदे में झुक गए किसी के
हमसे बचकर मिले गले
डाली न हम पर एक नज़र तुम
आवारा बादल हो गए

इश्क़ का यह कौन सा दयार है
कि हम ग़ज़ल हो गए

मुकद्दर की बात है शिकवा
तुमसे हम क्या करें
कहें हमदर्द तुम्हें हम या फिर
तुमको बेवफा कहें
खुदा का फरमान तुम बने हम
अमल ही रह गए

इश्क़ का यह कौन सा दयार है
कि हम ग़ज़ल हो गए
पानी की बूँद को मोती बनाकर
हम तो कमल हो गए

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