तेरे बिना शाम काटे न कटे
ये रातें भी अब धुंधली लगें
तेरे बिना हर खुशी अधूरी
लगे जैसे दुनिया छोड़ देंतेरा ख्याल ए मेरे जादूगर
हर पल दिल में बस जाए
तेरे बिना भी है क्या जीना
बेहतर है कि हम मर जाएँमीठी बातें तेरी शहद जैसी
हमें नींद से जगा जातीं है
तेरे बिन हर सुकूं बेमानी
कायनात तेरा पता देती हैतू कहाँ छिपा है ऐ जादूगर
तुझसे दूर अब न रहा जाए
तेरे बिना भी है क्या जीना
बेहतर है कि हम मर जाएँतेरे बिना मालूम हो मौसम
बसंत ऋतू जैसे बिन फूलों के
तेरे बिन है नादान दिले वीरां
तेरी चाहत लौ रौशन रखेखेल मुझसे फिर ऐ जादूगर
फरेब में ही दिल बहल जाए
तेरे बिना भी है क्या जीना
बेहतर है कि हम मर जाएँ