रुख़सती (Rukhsati)

कसम है बेटी माँ के रस्ते पर ही तुमको चलना है
बीवी बन कर मर्दों से गिन गिन कर बदले लेना है
दाल तेरे अब्बा की जैसे मैंने कभी न गलने दी
शौहर को सैंडल की पैनी नोंक पे तुमको रखना है
बीवी बन कर मर्दों से गिन गिन कर बदले लेना है

दूजी सीख कभी भी उसके झांसे में नहीं आना है
हर बात में नखरा कर उसका विश्वास हिलाना है
दिन बोले तो रात तू कहना सुबह को कहना सांझ
शातिर शौहर है पर तूने जेब में अपनी रखना है
बीवी बन कर मर्दों से गिन गिन कर बदले लेना है

काबू खुद पर रखेगी तो पीछे दुम हिलायेगा
पलकों पर रखेगा तुमको सारे नखरे उठाएगा
शक के हंटर से शौहर की अक्ल ठिकाने पर रखना
शेर बच्चे की अक्ल दाढ़ कभी न उगने देना है
बीवी बन कर मर्दों से गिन गिन कर बदले लेना है

सही समय हो जीवन में बच्चों में ध्यान लगा लेना
लेकिन उनकी जिम्मेदारी शौहर को थमा देना
घर में तेरी करे चाकरी ऑफिस में अफसर की
घर की मुर्गी दाल रहे चिकन न बनने देना है
बीवी बन कर मर्दों से गिन गिन कर बदले लेना है

जादू तेरा बना रहे यह ध्यान हमेशा रखना तू
रोज उलाहने दे दे कर हर इम्तिहान परखना तू
देख तेरे अब्बा को मैंने कैसे रबर बनाया है
ऐसा ही एक काठ का उल्लू तुझे बैठक में रखना है
बीवी बन कर मर्दों से गिन गिन कर बदले लेना है

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