वक़्त के अंधे कुए में (Waqt Ke Andhe Kue Main)

वक़्त के अंधे कुए में ग़म हुए कुछ दोस्त
यादों में बसा करते हैं वो बिछड़े हुए लोग
क्या होगा अचानक अगर सामने आ जाएँ
लौट आएंगे क्या वो फिर से बीते हुए रोज़

बनना बिगड़ना दुनिया का है दस्तूर
इस रवायत से है कायम जहांभर का नूर
लौट कर अपने कभी आ भी जाएँ तो
मशरूफियत में रिश्ते बन रह जाएंगे बेनूर

चला गया है जो उसे ऐ दिल याद तू न कर
यादों में रख मिलने की फारियाद तू न कर
रूप रंग नाते सब खो जाते हैं एक रोज़
बिछड़ जाते हैं तो नए जुड़ जाते नए लोग

मंज़िलो को रास्ते सफर को मंज़िलें बना
कर गुज़र कुछ ऐसा करे कायनात शुक्रिया
आज पर इख्तियार बस कल की न तू सोच
ले परवाज़ आसमां से परे जहां की ओर

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