ये समंदर यहां कभी पहले तो ना था
किसने आंसुओं के सैलाब बहाये हैं
ख्वाबों के जहां कभी रंग सजते थे
बेनूर फ़िज़ाओं के कालीन बिछाए हैंवो पल सुनहरे थे हाँ हमने देखे थे
हर शाम खुशियों के मेले सजते थे
बेतकल्लुफी से जब लोग मिलते थे
बेबाक हंसी के कहकहे लगते थे
धीरे धीरे फिर सब ख़त्म हो गया
दौरे महफ़िल किस्सा रह गयाये डर दिलों में पहले तो नहीं था
किसने परिंदों के दिल दहलाये हैं
ये समंदर यहां कभी पहले तो ना था
किसने आंसुओं के सैलाब बहाये हैं
ख्वाबों के जहां कभी रंग सजते थे
बेनूर फ़िज़ाओं के कालीन बिछाए हैंलोग एक दूसरे से नज़रें चुराते हैं
दिल की बात कहते घबराते हैं
हुक्मरानों के भी होश फाख्ता हैं
इलज़ाम एक दुसरे पर लगाते हैं
मज़लूम मासूम लोग कहाँ जाएँ
बुरे दौर में वही कुचले जाते हैंये डर दिलों में पहले तो नहीं था
किसने परिंदों के दिल दहलाये हैं
ये समंदर यहां कभी पहले तो ना था
किसने आंसुओं के सैलाब बहाये हैं
ख्वाबों के जहां कभी रंग सजते थे
बेनूर फ़िज़ाओं के कालीन बिछाए हैं