गोरे मन भाय रही
कारे संग ब्याह दई
मेरे लिखे करम ऐसे
बैठी पछताय रही
गोरे मन भाय रही
कारे संग ब्याह दईकारो उज्जड गांव को
मैं कचनार सहर की
चाखी पे पीस रही
चूल्हे पे पकाय रहीगोरे मन भाय रही
कारे संग ब्याह दईमैं नार हूँ बीए पास
कारो आठ फेल है
एबीसी पढाय रही
अंग्रेजी सिखाय रही
गोरे मन भाय रही
कारे संग ब्याह दई