हाँ में एक खिलौना हूँ

बच्चे की तरह मुझसे वो बस खेला करता है
खेल कर मुझसे वो यूँ मन बहलाता रहता है

कितनी बार टूटा हूँ मैं टूटकर फिर बना हूँ
बच्चे के हाथ में जैसे कि कोई खिलौना हूँ

मेरा वज़ूद इतना मन चाहे जब तक खेलेगा
ऊब गया जो मन तो नया खिलोना ले लेगा

चाबी किस्मत की को वो रोज घुमा देता है
प्यार से चूमता है मुझे कभी गिरा देता है

मेरा वज़ूद इतना मन चाहे जब तक खेलेगा
ऊब गया जो मन तो नया खिलोना ले लेगा

करूँ सवाल किससे सुनाऊँ हाल किसको मैं
वही है कर्ता फिर तो लगाऊं गुहार किससे मैं

बच्चे की तरह मुझसे वो बस खेला करता है
खेल कर मुझसे वो यूँ मन बहलाता रहता है

कितनी बार टूटा हूँ मैं टूटकर फिर बना हूँ
बच्चे के हाथ में जैसे कि कोई खिलौना हूँ

मेरा वज़ूद इतना मन चाहे जब तक खेलेगा
ऊब गया जो मन तो नया खिलोना ले लेगा

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